जशपुर ✍️जितेन्द्र गुप्ता
जशपुर स्वास्थ्य विभाग भर्ती प्रक्रिया पर सवालों का अंबार! मार्कशीट अपलोड नहीं, फिर भी अभ्यर्थी को मिली पात्रता, तीसरी दावा-आपत्ति के बाद परीक्षा में बैठने की अनुमति जबकि भर्ती विज्ञापन में 2 दावा आपत्ति का था प्रावधान अभ्यर्थी के परिजन ने बताया कलेक्टर और सीएचएमओ ने दिए गए शिकायत पे जांच उपरांत उचित कारवाही का दिया था भरोसा

विज्ञापन में नहीं था तीसरी दावा-आपत्ति का प्रावधान, फिर किस नियम के तहत खुला पात्रता का रास्ता? लिपिकीय त्रुटि बताकर विभाग ने झाड़ा पल्ला, अब एनआईसी की वेबसाइट पर दस्तावेज सत्यापन के लिए बुलाए जाने से फिर गरमाया मामला

पत्थलगांव। जशपुर जिले के स्वास्थ्य विभाग में लैब टेक्नीशियन पदों पर भर्ती की प्रक्रिया अब गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है। भर्ती विज्ञापन से लेकर दावा-आपत्ति, पात्रता सूची और परीक्षा में शामिल होने की अनुमति तक की पूरी प्रक्रिया को लेकर अभ्यर्थियों और उनके परिजनों ने सवाल खड़े किए हैं। मामला एक ऐसे अभ्यर्थी से जुड़ा है, जिसके ऑनलाइन आवेदन के साथ आवश्यक मार्कशीट अपलोड नहीं होने की बात सामने आई थी। इसके बावजूद पहले उसे पात्र घोषित किया गया, फिर अंतिम दावा-आपत्ति में अपात्र दर्शाया गया और बाद में कथित तौर पर तीसरी दावा-आपत्ति के जरिए परीक्षा में बैठने का रास्ता भी खुल गया।

मामले की शुरुआत 2 मार्च 2026 को स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी भर्ती विज्ञापन से हुई थी। लैब टेक्नीशियन के कुल 6 पदों के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए थे। निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार अभ्यर्थियों को अपने दस्तावेज जशपुर जिले की वेबसाइट पर ऑनलाइन अपलोड करने थे। इसी भर्ती में गरियाबंद निवासी कामदेव, पिता मढ़ीराम के दस्तावेजों को लेकर विवाद सामने आया।

अभ्यर्थियों के अनुसार, जशपुर एनआईसी की वेबसाइट पर उपलब्ध सूची में कामदेव की आवश्यक मार्कशीट अपलोड नहीं दिखाई दे रही थी। ऐसे में सवाल उठता है कि जब आवेदन के साथ अनिवार्य दस्तावेज ही उपलब्ध नहीं था, तो नियमानुसार प्रारंभिक जांच में ही उन्हें अपात्र क्यों नहीं किया गया?
तीन चरणों की कहानी, पात्रता का बदलता गणित!
मामले में सबसे बड़ा सवाल दावा-आपत्ति की प्रक्रिया को लेकर है। बताया जा रहा है कि पहली तीन दिवसीय दावा-आपत्ति प्रक्रिया में कामदेव को पात्र घोषित कर दिया गया। इसके बाद 25 जून 2026 के विज्ञापन के आधार पर सात दिवसीय दावा-आपत्ति का अवसर दिया गया। इस प्रक्रिया के अंतिम चरण में जारी सूची में कामदेव की मार्कशीट अपलोड नहीं होने का उल्लेख करते हुए उन्हें अपात्र दर्शाया गया था। वहीं, इस सूची में कुल 12 अभ्यर्थियों को पात्र बताया गया था।

लेकिन कहानी यहीं समाप्त नहीं हुई। आरोप है कि इसके बाद तीसरी दावा-आपत्ति की प्रक्रिया शुरू की गई, जबकि भर्ती विज्ञापन में ऐसी किसी तीसरी दावा-आपत्ति का स्पष्ट प्रावधान नहीं था। इसी कथित तीसरी प्रक्रिया के बाद कामदेव का नाम फिर सामने आया और उन्हें परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दे दी गई।

अब सवाल यह है कि जब अंतिम दावा-आपत्ति में किसी अभ्यर्थी को दस्तावेज अपलोड नहीं होने के आधार पर अपात्र घोषित कर दिया गया था, तो बाद में किस नियम और किस आदेश के तहत उसकी पात्रता बहाल की गई? क्या सभी अभ्यर्थियों को समान अवसर दिया गया या किसी एक अभ्यर्थी के लिए अलग प्रक्रिया अपनाई गई?
शिकायत के बाद विभाग का जवाब—लिपिकीय त्रुटि!
इस पूरे मामले को लेकर प्रभावित अभ्यर्थियों और उनके परिजनों ने कलेक्टर जशपुर एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचएमओ) के समक्ष लिखित शिकायत प्रस्तुत कर जांच और उचित कार्रवाई की मांग की थी। परिजनों के मुताबिक, अधिकारियों ने शिकायत में उठाए गए बिंदुओं को गलत बताया और जांच कर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया।

इसके बाद स्वास्थ्य विभाग की ओर से व्हाट्सऐप के माध्यम से पत्र भेजकर पूरे मामले को लिपिकीय त्रुटि बताया गया। लेकिन विभाग के इस जवाब ने विवाद को समाप्त करने के बजाय कुछ नए सवाल खड़े कर दिए।
यदि यह केवल लिपिकीय त्रुटि थी, तो मूल ऑनलाइन आवेदन में अपलोड नहीं दिखाई देने वाला दस्तावेज बाद में किस आधार पर मान्य हुआ? क्या संबंधित मार्कशीट निर्धारित समय-सीमा में अपलोड की गई थी? यदि नहीं, तो बाद में उसे स्वीकार करने का आदेश किस अधिकारी ने जारी किया? और यदि गलती विभागीय स्तर पर हुई थी, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी तय की गई?
अब एनआईसी की वेबसाइट पर फिर पात्रता, दस्तावेज सत्यापन के लिए बुलावा!
ताजा घटनाक्रम में जशपुर एनआईसी की वेबसाइट पर कामदेव को पात्र दर्शाते हुए दस्तावेज सत्यापन के लिए बुलाया गया है। दस्तावेज सत्यापन भर्ती प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा है, लेकिन इस मामले में पात्रता सूची में बार-बार हुए बदलाव और पहले अपात्र घोषित किए जाने के बाद दोबारा पात्रता मिलने की परिस्थितियों ने पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सबसे बड़ा सवाल—नियम सभी के लिए एक या अलग-अलग?

भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता का तकाजा है कि प्रत्येक अभ्यर्थी के लिए एक समान नियम लागू हों। यदि किसी अभ्यर्थी का दस्तावेज निर्धारित समय पर अपलोड नहीं था, तो उसकी पात्रता किस आधार पर बहाल हुई, इसका स्पष्ट जवाब सार्वजनिक होना चाहिए। साथ ही यह भी बताया जाना चाहिए कि तीसरी दावा-आपत्ति की अनुमति किस नियम, आदेश अथवा सक्षम अधिकारी की स्वीकृति से दी गई।
अब जरूरत केवल लिपिकीय त्रुटि बताकर मामले को समाप्त करने की नहीं, बल्कि ऑनलाइन आवेदन की मूल स्थिति, दस्तावेज अपलोड होने की तारीख, सभी पात्रता सूचियों, दावा-आपत्ति के आदेशों और परीक्षा में शामिल करने की अनुमति की निष्पक्ष जांच कराने की है।
आखिर छह पदों की भर्ती में पात्रता का यह बदलता हिसाब किस नियम से चला? क्या विभाग सभी अभ्यर्थियों के सामने पूरी प्रक्रिया का रिकॉर्ड सार्वजनिक करेगा? इन सवालों के जवाब का इंतजार उन अभ्यर्थियों को भी है, जिन्होंने निर्धारित नियमों के तहत आवेदन किया और भर्ती में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा की उम्मीद लगाई थी।
इस मामले को लेकर ज्वाइंट डायरेक्टर केडी पैंकरा एवं सीएचएमओ जात्रा को फोन करने पर दोनों अधिकारी ने फोन नहीं उठाया।
























