पत्थलगांव जितेन्द्र गुप्ता✍️
मौत के बाद जमीन की रजिस्ट्री! कछार में कागजों की कूटरचना का आरोप, न्याय की गुहार लेकर एसडीओपी के दरवाजे पहुंचे कई दर्जन ग्रामीण
ग्राम कछार के जमीन को लेकर चल रहा विवाद अब नया मोड़ लेता नजर आ रहा है। ग्रामीणों ने जमीन के दस्तावेजों में कथित कूटरचना कर रजिस्ट्री किए जाने का गंभीर आरोप लगाते हुए अनुविभागीय अधिकारी पुलिस धुर्वेश जायसवाल के समक्ष रखी अपनी आपबीती रखी। ग्रामीणों का कहना है कि मामले की शिकायत थाने से लेकर एसडीओपी और एसडीओ राजस्व तक की जा चुकी है, लेकिन अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
सबसे बड़ा सवाल मीनू चौहान की जमीन को लेकर उठ रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक मीनू चौहान की मृत्यु के कुछ ही समय बाद उनकी जमीन से संबंधित दस्तावेज तैयार कर जमीन किसी अन्य के नाम रजिस्ट्री कर बेच दी गई। ग्रामीणों ने मृत्यु प्रमाण पत्र की तारीख को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनका दावा है कि मीनू चौहान की मृत्यु 9 जुलाई को हुई थी, जबकि कछार ग्रामपंचायत के द्वारा बनाये गए मृत्यु प्रमाण पत्र में तारीख 29 जुलाई दर्ज है। ग्रामीणों का सवाल है कि आखिर मृत्यु प्रमाण पत्र किसने बनवाया और मृत्यु की तारीख में कथित बदलाव क्यों हुआ
ग्रामीणों ने बताया कि मीनू चौहान के निधन के समय से संबंधित शोक पत्र और अन्य कार्यक्रमों में 9 जुलाई की तारीख का उल्लेख है। ऐसे में मृत्यु प्रमाण पत्र में अलग तारीख दर्ज होने को लेकर जांच की मांग तेज हो गई है।

मीनू चौहान की मृत्यु तारीख👆
जमीन विवाद ने पंचायत में लिया उग्र रूप
इसी जमीन विवाद को लेकर सोमवार को ग्राम पंचायत में विवाद उस समय गरमा गया, जब पुष्पा चौहान द्वारा सरपंच और सचिव के साथ कथित मारपीट किए जाने की बात सामने आई। पुलिस ने मामले में तत्काल कार्रवाई करते हुए पुष्पा चौहान और उनकी भाभी को रात में ही पकड़ लिया और कार्रवाई शुरू कर दी।
ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से जमीन संबंधी शिकायत पर कार्रवाई नहीं होने के कारण लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही थी। हालांकि, ग्रामीणों ने यह भी कहा कि विवाद चाहे कितना भी गंभीर हो, मारपीट किसी समस्या का समाधान नहीं है।

कछार मीनू चौहान के मरने के बाद गाँव मे दिए गए शोक पत्र👆
ग्रामीणों का सवाल—गरीब की जमीन चली जाए तो वह आखिर जाए कहां
ग्रामीणों ने अपनी पीड़ा जाहिर करते हुए कहा कि यदि किसी गरीब और असहाय व्यक्ति की पूरी जमीन ही कथित रूप से फर्जी दस्तावेज तैयार कर किसी दूसरे के नाम कर दी जाए, तो पीड़ित आखिर न्याय के लिए कहां जाए ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
एसडीओपी ने दिए दस्तावेज जुटाने के निर्देश
अनुविभागीय अधिकारी पुलिस धुर्वेश जायसवाल ने बताया कि कछार से आए ग्रामीणों ने जमीन से संबंधित दस्तावेजों में कथित कूटरचना और रजिस्ट्री की शिकायत की है। ग्रामीणों ने उन्हें पूरे मामले की अनेक जानकारी दी है। एसडीओपी ने कहा कि जमीन से संबंधित तैयार किए गए सभी दस्तावेजों की सत्य प्रतिलिपि प्राप्त करने के लिए आदेश दिए गए हैं। कुछ दस्तावेज प्राप्त हो चुके है कुछ के प्राप्त करने कार्यवाही चल रही है। सभी मिले कागजतो के बाद उनके आधार पर जांच की जाएगी और कूटरचना में जो भी लोग संबंधित पाए जाएंगे, उनके खिलाफ नियमानुसार उचित कार्रवाई की जाएगी।
अब देखना यह है कि दस्तावेजों की जांच में क्या सामने आता है। क्या सच में मौत के बाद जमीन के कागज तैयार हुए है। उन कागजतो को किसने बनवाया है। इस पूरे परिक्रिया में कौन कौन सम्मलित है।


























