कोरबा ✍️जितेंद्र गुप्ता
सफलता की कहानी अतिथि का नामः बिल्डर ग्राम/पंचायतः भर्रागुड़ा
स्व-सहायता समूहः जय माँ शारदा स्व-सहायता समूह व्यवसाय: आटा चक्की संचालन
ग्राम पंचायत भर्रागुड़ा की निवासी श्रीमती उर्मिला राठौर जय माँ शारदा स्व-सहायता समूह की सक्रिय सदस्य हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने के उद्देश्य से उन्होंने आजीविका मिशन से जुड़कर आटा चक्की व्यवसाय प्रारंभ करने का निर्णय लिया।
व्यवसाय को शुरू करने एवं सुदृढ़ बनाने के लिए उन्हें रिवॉल्विंग फंड (RF) से ₹1,000, सीआईएफ (CIF) से ₹5,000 तथा बैंक से ₹30,000 का ऋण प्राप्त हुआ। इस वित्तीय सहायता से उन्होंने आटा चक्की स्थापित की और नियमित रूप से ग्रामीणों को गुणवत्तापूर्ण पिसाई की सुविधा उपलब्ध करानी शुरू की।
आज उनके व्यवसाय से परिवार को नियमित आय प्राप्त हो रही है। पहले उनकी वार्षिक आय लगभग ₹25,000 थीए जो अब बढ़कर लगभग ₹35,000 हो गई है। इस अतिरिक्त आय से वे अपने परिवार की आवश्यकताओं को बेहतर ढंग से पूरा कर रही हैं तथा बच्चों की शिक्षा एवं घरेलू खर्चों में आर्थिक रूप से सक्षम बनी हैं।
श्रीमती उर्मिला राठौर की सफलता यह दर्शाती है कि स्व-सहायता समूहए बैंक ऋण और आजीविका मिशन की सहायता से ग्रामीण महिलाएँ आत्मनिर्भर बनकर अपने परिवार एवं समाज के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं। उनकी कहानी अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणास्रोत है कि सही मार्गदर्शनए मेहनत और वित्तीय सहयोग से आर्थिक सशक्तिकरण का सपना साकार किया जा सकता है।
























