पत्थलगांव ✍️जितेन्द्र गुप्ता
गोर्रापारा मुडेकेला में श्रीमद भागवत कथा संगीतमय महोत्सव के छठवे दिन का आयोजन

लीला पुरुषोत्तम भगवान श्री कृष्ण जी एवं राधे रानी की महती कृपा एवं पूर्वजों के शुभाशीष स्वरूप परम सौभाग्य से संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा भक्तिज्ञान महोत्सव आयोजन के छठवा दिन ग्राम गोर्रापारा मुड़ेकेला में श्रीमद भागवतकथा श्रध्देय पं. श्री घनश्याम प्रसाद तिवारी भाटापारा रायपुर विराजमान होकर अपनी संगीतमय एवं रसमयी ललित मधुरमयी वाणी से भक्तों को श्रीमद्भागवत कथामृत का रसास्वादन करा रहे है। उन्होंने कहा कि कथा स्थल में जरूर आना चाहिए वह जाककर कथा सुनने से जीवन को समझने का मौका मिलता है बस कथा सुनकर उन बातों को अपने जीवन मे उतारने की जरूरत भर है।
श्रीमद भागवत कथा के आयोजन कर्ता युधिष्ठिर मीरा यादव, उपेंद्र देवंती यादव एवं समस्त ग्रामवासी है। जिन्होंने आसपास के सभी ग्रामवासी से को कथास्थल में आने निमंत्रित करते हुए कहा आप सभी प्रेमी महानुभावों से सादर अनुरोध हैं कि आप सहकुटुम्ब, सपरिवार सहित इस पवित्र महोत्सव में शामिल होकर श्रीमद्भागवत कथामृत का रसपान कर आत्म आनंद की अनुभूति कर भागवत प्रेम प्राप्त करें और मानव जीवन का कृतार्थ करें।

शनिवार को श्रीमद भागवत कथा के छठवे दिन पंडित घनश्याम मिश्रा ने भगवान कृष्ण के गोकुल को त्यागने की कथा बताया कि कान्हा ने कहा कि मैने क्यो जन्म लिया है। मुझे क्या करना है। अगर मैं गोकुल में ही रहा तो धर्म की रक्षा कैसे होगी उधर मामा कंश ने भगवान कृष्ण को मथुरा बुलाने भेजा कि जैसे भी हो कृष्ण को यहां ले आवो यहां आने पर हम मिलकर कृष्ण को मार देंगे और जब कृष्ण को लेने गए चाचा अक्रूर गए तब कृष्ण ने खुस होकर कहने लगे कि मामा के यहां जाना है पर माँ यशोदा जाने नही दे रही थी तब कृष्ण ने कहा कि माँ मुझे जाने दो दो दिन में लौट आऊंगा माँ जब ज्यादा रोने लगी तो कृष्ण ने फिर से कहा मा तू चिंता मत कर मैं दो दिन में आजाउंगा मा फिर से कहती है कि मुझे सब मालूम है कि तू अब गोकुल नही आएगा अपने साइन में पत्थर रख कर कहा कि मैं तेरी माँ नही हूँ तेरी मा तो देवकी है। तब कृष्ण ने कहा कि दुनिया कुछ भी कहे पर मैं तेरा ही बेटा रहूंगा रथ सजाया गया रथ में बैठ कर जाने लगे तब 16 हजार गोपियाँ ने रथ को रोक कहने लगी हम नही जाने देंगे और कुछ दूर में राधा भी रास्ता में खड़ी है। जो कान्हा को जाने नही देना चाहते थे पर कृष्ण कहा मानने वाले थे उन्हें तो गोकुल को त्यागना ही था उन्होंने गोकुल को त्याग दिया क्योकि कृष्ण को तो धर्म की स्थापना करना था।

और भगवान पहुच गए मथुरा मथुरा पहुचने पर एक हाथी आया जिसमे 1000 हाथियों का बल था उस हाथी का भगवान ने उद्धार किया फिर पहुचे कंश के राजदरबार में वहां भी पांच कंश के पहलवान बड़े ताकतवर थे जीका भगवान उद्धार किया और कंश के केश को पकड कर यमुना तट लेगये और वहां कंश का वध किया और फिर कृष्ण रुक्मिणी विवाह की कथा सुनाया

पंडित घनश्याम मिश्रा ने अपने कथा के बीच बीच मे भजनों के द्वारा भक्तो को झूमने को मजबूर कर दिया, कृष्ण बड़ा प्यारा है गोपाल बड़ा प्यारा है । इस तरह के भजन के माध्यम से सभी भक्त कथा स्थल में झूमते रहे।
























