पत्थलगांव ✍️जितेन्द्र गुप्ता
पूरे अंचल में भाई बहन के अट्टू बन्धन के रिश्ते का त्यौहार रक्षाबन्धन धूमधाम से मनाया जा रहा

पूरे क्षेत्र में भाई बहन के पवित्र रिश्ते का पारंपरिक त्यौहार रक्षाबन्धन खूब धूमधाम से मनाया गया बीते एक हफ़्तों से राखी का बाजार पूरी तरह से सजा रहा मिठाई की दुकानो में खूब भीड़ देखी गई भारतीय धर्म-संस्कृति के अनुसार रक्षाबन्धन का त्योहार श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है।

बहने आपस मे भी राखी बांधते🖕
यह त्योहार भाई-बहन को गहन स्नेह की डोर में बाँधता है। इस दिन बहन अपने भाई के माथे पर टीका लगाकर आरती की थाल सजा कर दिया जलाकर आरती कर रक्षासूत्र या राखी का बन्धन बाँधती है, जिसे राखी कहते हैं। यह हिन्दू त्योहार है जो प्रतिवर्ष श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन ही मनाया जाता है। श्रावण मास में मनाये जाने के कारण इसका महत्व और बढ़ जाता है।

9 तारीख रक्षाबन्धन के दिन ही श्रावण मास का अंतिम दिन भी होता है। रक्षाबन्धन में राखी या रक्षासूत्र का सबसे अधिक महत्त्व है।

राखी कच्चे सूत से लेकर एक से एक रंगीन कलावे, रेशमी धागे, तथा सोने या चाँदी जैसी महँगी राखी भाई के कलाई पे बहन बांधती है। सभी बहने रक्षाबन्धन के दिन बहने भगवान् से अपने भाईयों की सुख शांति और उन्नति के लिए प्रार्थना करती हैं। सामान्यत बहनें ही भाइयों को राखी बाँधती हैं, परन्तु ब्राह्मणों, गुरुओं और परिवार में छोटी बड़ी सभी लड़किया आपस मे राखी बांधती है। काफी दूर में रह कर पढाई करने वाले या नोकरी करने वाले दोस्त आपस मे एक दूसरे को राखी बांध कर भाई बहन का फर्ज बखूबी निभाते है। सम्मानित सम्बन्धियों जैसे पुत्री द्वारा पिता को भी बाँधी जाती है। आपको बता दे सार्वजनिक रूप से किसी नेता या प्रतिष्ठत व्यक्ति या सरकारी विभागों में रहकर कार्य करने वाले भाई को स्थानीय संस्था स्कूल की बहने राखी बाँध कर उन्हें अपने बहन से दूर रहकर भी बहन के पास रहने का अहसास कराती है। रक्षाबंधन के दिन भाई अपने बहन को राखी के बदले उपहार देते है। चाहे वो पैसा हो या कपड़े या फिर सोने चांदी के गहने सभी अपने सामर्थ्य से अपनी बहनों को उपहार देकर खुश रखते है।
























