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जशपुर जिले के सिविल अस्पताल का हाल बेहाल डियुटी डॉक्टर तक का पता नही जो डॉक्टर है भी वो कह रही है मेरा समय खत्म हो चुका मरीज जाए तो कहा….

 

जशपुर जिले के पत्थलगांव सिविल अस्पताल की ब्यवस्था में कब होगी सुधार अस्पताल के डॉक्टर में नही है संवेदना

पत्थलगांव ✍️जितेन्द्र गुप्ता

अस्पताल से 50 मीटर की दूरी में कार में बैठे बैठे शिक्षक कार्तिककेश्वर निषाद अपने कार में हार्ट अटैक से हुई मौत आनन फानन में आसपास मौजूद लोगों ने जान बचाने के लिए सीपीआर देकर जान बचाने के भरसक प्रयास के बाद भी कुछ न हो सका वही पास में मौजूद सिविल अस्पताल पत्थलगांव के मेन गेट में कार के साथ निषाद को लाया तो गया पर पत्थलगांव अस्पताल की संवेदना जिनके ऊपर होती है जान बचाने की जिम्मेदारी न डाक्टर और न नर्स कोई भी मौजूद नही कार्तिकेश्वर निषाद के परिवार के लोग ऊपर जाकर डाक्टर पता किये वहां मौजूद किसी ने नर्स को अस्पताल के गेट के पास भेजने की बात कही पर आया कोई नही

अस्पताल में डियूटी डाक्टर कौन है इसकी जानकारी कभी किसी को नही रहती क्योकि डियुटी बोर्ड रहता है खाली सिर्फ जिसकी डियुटी है उसे ही मालूम रहता है कि आज डियूटी किसकी है। बाकी लोगो को या अस्पताल में आने वाले मरीज या उनके परिवार जनो  को डियूटी डाक्टर की जानकारी नही रहती क्योकि अस्पताल बोर्ड में कभी जानकारी लिखा ही नही जाता रविवार आज भी बोर्ड में डाक्टर, मोबाइल नम्बर, दिनाँक और समय तो लिखा हुआ है पर डॉक्टर का नाम मोबाईल नम्बर और दिनाँक सब हमेशा की तरह खाली अब कैसे जानेंगे कि डियूटी किसकी डॉक्टर की है। अन्य सोर्सेस से डियुटी डाक्टर का पता करने पर डॉक्टर संदीप भारतेंदु को 7 बज कर 52 मिनट पे फोन किया गया पर उन्होंने  अपनी डियुटी नही होने की बात कहि अब फिर से कार्तिकेश्वर निशाद के परिवार वालो को ऊपर नर्स रूम में भेज कर डियुटी डॉक्टरों का पता करने या बुलाने भेजा गया तो 8 बजे डाक्टर जया परहा  नीचे अस्पताल के गेट में पहुँची उसी समय बीएमओ डॉक्टर जेम्स मिंज का फोन आया तो उनसे अस्पताल में डाक्टर से लेकर नर्स के नही होने की बात कही गई मौजूद डाक्टर से निषाद को देखने की बात कही यही से शुरू होता है।

डॉक्टरों की संवेदनसीलता का खेल डॉक्टर जया परहा ने कहा कि इन्हें ऊपर लाइये निषाद के परिवार जनों का रो रोकर बुरा हाल था डियूटी डॉक्टर से अस्पताल के गेट के पास ही स्थिति को देखने कहा गया कि क्या जान बची है।  फिर भी डॉक्टर जया परहा ने मरीज को देखने या जान बचाने की कोई पहल करने बजाय मौजूद लोगों से बहस करना जारी रखा जिस पर उनसे वहां से किनारे होने कहा गया पास में मौजूद डॉक्टर शकुंतला निकुंज को बुलाया गया और उन्होंने कार्तिकेश्वर निशाद को देखते हुए कहा कि अब जान नही बची है। मौत ही चुकी है।  जिस पर अस्पताल की बाकी प्रक्रिया को पूरा करने मौजूद डॉक्टर जया परहा को कहने पर उन्होंने कहा कि मेरा समय अब खत्म हो चुका है उस समय सुबह के आठ बजकर आठ मिनट हो रहे थे जबकि नियम ये कहता है। कि डियूटी समाप्त होने के बाद भी अगर आप वहाँ अन्य डियुटी डॉक्टर के पहुचने तक है।  तो आपको आपात स्थिति में मरीज को देखना जरूरी है। अनिवार्य है । मेरा  समय खत्म हो चुका है ये कहकर आप अपनी जिम्मेदारी से भाग नही सकते। ये डॉक्टर की जिम्मेदारी है कि हर हाल में मरीज की जान बचाने के प्रयास किये जायें।

रविवार सुबह 7 बजकर 10 मिनट से सीविल अस्पताल के गेट के पास मौजूद पार्षद अजय अग्रवाल ने कहा कार में बैठे निषाद की हार्ट अटैक से मौत होने के बाद गेट के पास उन्हें लाया गया पर अस्पताल के गेट के पास न कोई अटेंडर या वार्ड बाय मौजूद नही था ऊपर परिवार के लोग डॉक्टर या नर्स को बुलाने गए वहां भी कोई नही था गेट के पास मौजूद लोग अन्य डॉक्टरो को फोन करते रहे सिविल अस्पताल पत्थलगांव में ब्यवस्थाये आखिर कब सुधरेगी कैसे और क्यो लेकर सरकारी अस्पताल लेकर मरीज आये कोई सरकारी अस्पताल के लेट लतीफी के चक्कर मे मरीज और उसके परिवार क्या करेंगे कहा कहा भागते फिर लोग।

समाजसेवी मुकेश अग्रवाल ने बताया कि कार्तिकेश्वर निशाद की कार में बैठे हार्ट अटैक से मौत हुई लोगो को इधर उधर भागते देखा टिंकू सामन्त ने सीपीआर देकर जान बचाने का प्रयास किया पर जान नही बचाई जा सकी अस्पताल के गेट के पास आधे घण्टे से निशाद के परिवार के लोग और मौजूद अन्य लोग डाक्टर और नर्स की खोज खबर करते  रहे हमेशा की तरह किसीका कोई पता नही चला अस्पताल का आपातकालीन चिकित्सा पटल पूरा खाली  किसकी डियुटी है। कोई पता नही आठ बजे जो डॉक्टर अस्पताल के गेट के पास आई भी तो किसी तरह की कोई संवेदनशीलता नह दिखाई जबकि डॉक्टर ही होता है। जिसे लोग भगवान मान कर आस लगाते है।  की अब जान बच सकती है। पर आजकल के सरकारी अस्पताल के डॉक्टरों में संवेदनशील की भारी कमी देखी जा रही है। जो पूरी तरह जिम्मेदारी से कोसो दूर रहते है। उन्हें मरीज की जान या उनके परिवार जनों की हुई जान की क्षती से कोई मतलब नही रहता

2 मार्च को सिविल अस्पताल के द्वारा जारी किए आदेश में डियुटी डॉक्टर शनिवार रात आठ बजे से रविवार सुबह आठ बजे तक डियुटी डॉक्टर संदीप भारतेंदु का नाम है। जबकि रविवार सुबह 7 बजकर 52 मिनट में संदीप भारतेंदु को फोन में बात करने पर उन्होंने अपनी डियूटी नही होने की बात कही  अब आप समझिये की सरकारी अस्पताल आपात कालीन चिकित्सा पटल का खाली होना डियूटी डॉक्टर चार्ट में नाम होने पर डियूटी नही होना कहना और जो डॉक्टर है। वो अपना समय खत्म हो चुका कहना किस तरह की संवेदनशीलता को दर्शाता है। क्या डॉक्टरों को सही ट्रेनिंग देने की आवश्यकता या फिर सिर्फ डॉक्टर बन गए पर जिम्मेदारी नाम की कोई चीज नही।  जिले के आला अफसर इस संवेदनशील मामलों में किस तरह की जांच करते है। या हर बार की तरह हवा हवाई जांच कर मामले में परदा डाल कर जिम्मेदारी से भागा जाएगा

 

शिक्षक कार्तिकेश्वर निशाद की हार्ट अटैक से मौत हो गई पर क्या सरकारी अस्पताल में मरीज को जान बचाने लोग कैसे लाये  आपात स्थिति में 1 से 5 मिनट मरीज ही जान बचाने का समय कई बार मिलता है। तो सरकारी अस्पतालों में लाकर क्या करे जहां किसी तरह की कोई ब्यवस्था ही नही हो न  डॉक्टरों का कोई अता पता हो न किसी तरह  कि कोई जानकारी  आपातकालीन बोर्ड  में लिखा हो।

Abtak News 24
Author: Abtak News 24

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