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दोकड़ा में श्रद्धा और उल्लास के साथ सम्पन्न हुई भगवान श्री जगन्नाथ की बहुड़ा रथयात्रा……

डोकड़ा जशपुर जितेन्द्र गुप्ता✍️

दोकड़ा में श्रद्धा और उल्लास के साथ सम्पन्न हुई भगवान श्री जगन्नाथ की बहुड़ा रथयात्रा

श्री मंदिर के गजपति एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की पुत्री स्मृति साय और उनके भाई विनोद साय ने निभाई गजपति महाराजा की परंपरा

मौसीबाड़ी से श्री मंदिर की ओर लौटे महाप्रभु, अब तीन दिवसीय विशेष अनुष्ठानों के बाद होगा गर्भगृह में प्रवेश

आज सुना वेश, रविवार को अधर पाना और सोमवार को नीलाद्री विजय के साथ श्री मंदिर में होगा पुनः प्रवेश, रसगुल्ला अर्पित कर लक्ष्मी माता को मनाने की निभाई जाएगी परंपरा

जशपुर जिले के विकासखंड कांसाबेल स्थित ऐतिहासिक श्री जगन्नाथ मंदिर दोकड़ा में शुक्रवार को भगवान श्री जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र एवं बहन सुभद्रा की पावन बहुड़ा रथयात्रा श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ सम्पन्न हुई। मौसीबाड़ी में नौ दिनों तक भक्तों को दर्शन देने के बाद महाप्रभु भव्य रथ पर विराजमान होकर पुनः श्री मंदिर के लिए प्रस्थान किए। हजारों श्रद्धालुओं ने “जय जगन्नाथ” के उद्घोष, हरिनाम संकीर्तन, भजन-कीर्तन और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच रथ की रस्सी खींचकर भगवान का स्वागत किया।


इस वर्ष बहुड़ा रथयात्रा में मंदिर के गजपति के रूप में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की पुत्री स्मृति साय एवं उनके भाई विनोद साय ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार भगवान की पूजा-अर्चना कर गजपति महाराजा की परंपरा का निर्वहन किया। उन्होंने भगवान श्री जगन्नाथ के समक्ष प्रदेश की सुख-समृद्धि, शांति एवं जनकल्याण की कामना की तथा विधिवत पूजा के उपरांत रथयात्रा का शुभारंभ कराया।
बहुड़ा यात्रा के साथ भगवान श्री जगन्नाथ, बलभद्र एवं सुभद्रा श्री मंदिर परिसर लौट आए हैं, किंतु परंपरा के अनुसार वे अभी तीन दिनों तक रथ पर ही विराजमान रहेंगे। इस दौरान प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु भगवान के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करेंगे।
मंदिर समिति के अनुसार शनिवार को भगवान का भव्य सुना वेश (सोना वेश) होगा, जिसमें महाप्रभु को स्वर्णाभूषणों से अलंकृत किया जाएगा। रविवार को अधर पाना की परंपरा निभाई जाएगी तथा सोमवार को नीलाद्री विजय के अवसर पर भगवान पुनः श्री मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश करेंगे।
नीलाद्री विजय की सबसे विशेष परंपरा में भगवान श्री जगन्नाथ, माता लक्ष्मी को रसगुल्ला अर्पित कर उन्हें मनाने का प्रयास करेंगे। मान्यता है कि रथयात्रा पर बिना बताए चले जाने से माता लक्ष्मी रुष्ट हो जाती हैं और भगवान रसगुल्ला अर्पित कर उनका मान-मनौव्वल करते हैं। यह परंपरा श्रद्धालुओं के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र रहती है। गौरतलब है कि दोकड़ा की ऐतिहासिक रथयात्रा वर्ष 1942 से निरंतर आयोजित की जा रही है और आज यह आयोजन छत्तीसगढ़, ओडिशा तथा झारखंड के श्रद्धालुओं के लिए आस्था, संस्कृति और सामाजिक समरसता का प्रतीक बन चुका है। बहुड़ा रथयात्रा में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर भगवान श्री जगन्नाथ के दर्शन किए तथा क्षेत्र की सुख-समृद्धि और कल्याण की कामना की।

Abtak News 24
Author: Abtak News 24

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