बगीचा जशपुर जितेन्द्र गुप्ता✍️
50 वर्ष पुरानी सरईपानी व्यपवर्तन योजना का राजस्व रिकॉर्ड होगा अद्यतन
’15 किमी लंबी सिंचाई नहर की अधिग्रहित भूमि के चिन्हांकन की प्रक्रिया शुरू, पांच गांवों के किसानों को मिलेगा दीर्घकालिक लाभ’
लगभग पांच दशक पूर्व निर्मित सरईपानी व्यपवर्तन योजना के अंतर्गत संचालित करीब 15 किलोमीटर लंबी सिंचाई नहर के राजस्व अभिलेखों को अद्यतन करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रशासनिक पहल शुरू हो गई है। जल संसाधन उप संभाग कांसाबेल ने तहसीलदार बगीचा को आधिकारिक पत्र भेजकर नहर निर्माण के लिए अधिग्रहित भूमि का राजस्व नक्शे में विधिवत चिन्हांकन करने तथा नियमानुसार सीमा चिन्ह स्थापित करने का अनुरोध किया है।

यह कार्रवाई सुशासन तिहार में प्राप्त आवेदन पर जल संसाधन विभाग द्वारा की गई प्रशासनिक पहल के तहत प्रारंभ हुई है। विभागीय पत्र की प्रतिलिपि कार्यपालन अभियंता जल संसाधन विभाग तथा अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) को भी भेजी गई है, ताकि दोनों विभागों के समन्वय से आवश्यक कार्रवाई समयबद्ध रूप से पूरी की जा सके।
वर्ष 1975 में निर्मित सरईपानी व्यपवर्तन योजना का प्रमुख स्टॉप डैम कदमटोली-घुघरी में स्थित है। यहीं से निकलने वाली मुख्य नहर एवं उसकी शाखाएं महुआडीह सहित पांच गांवों के किसानों को वर्षों से सिंचाई सुविधा उपलब्ध करा रही हैं। वर्ष 2025 में नहर की सीमेंट कंक्रीट (सीसी) लाइनिंग कर उसका आधुनिकीकरण भी किया गया, जिससे जल संरक्षण और सिंचाई व्यवस्था को और अधिक मजबूती मिली।
विशेषज्ञों के अनुसार अधिग्रहित नहर भूमि का राजस्व अभिलेखों में स्पष्ट चिन्हांकन होने से शासकीय भूमि का अभिलेखीय संरक्षण मजबूत होगा, सीमांकन संबंधी अनावश्यक विवादों में कमी आएगी तथा भविष्य में सिंचाई परियोजनाओं के संचालन एवं विकास कार्यों के लिए सटीक राजस्व रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा।
प्रशासनिक स्तर पर इसे जल संसाधन विभाग और राजस्व विभाग के समन्वित प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। क्षेत्र के किसानों ने उम्मीद जताई है कि इस पहल से वर्षों पुराने राजस्व अभिलेख वर्तमान स्थिति के अनुरूप अद्यतन होंगे और परियोजना का दीर्घकालिक संरक्षण सुनिश्चित होगा।






















