पत्थलगांव जितेंद्र गुप्ता ✍️
एनएच-43 पर गड्ढों का ‘राज’! बारिश में सड़क बना जी का जंजाल रोज अस्पताल पहुंच रहे गड्ढों में गिरकर राहगीर
बारिश ने पत्थलगांव की सड़कों की बदहाली की पोल खोलकर रख दी है। शहर से गुजरने वाले एनएच-43 के अंबिकापुर रोड पर कदम घाट से लेकर मछली बाजार तक सड़क की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि यहां सफर करना लोगों के लिए किसी जोखिम से कम नहीं है। जगह-जगह बने बड़े-बड़े गड्ढे वाहन चालकों के लिए मुसीबत बने हुए हैं और खासकर दोपहिया वाहन चालक इन गड्ढों की चपेट में आकर दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश के दौरान सड़क पर पानी भर जाने से कई गड्ढे दिखाई तक नहीं देते।ऐसे में वाहन चालक अचानक गड्ढों में जा गिरते हैं और चोटिल होकर अस्पताल पहुंचने को मजबूर हो रहे हैं। सड़क की यह तस्वीर जिम्मेदार विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर रही है।
पहले जैसे हालत गड्ढों में है सड़क या सड़क में है। गड्ढे विभाग के राष्ट्रीय राजमार्ग केअधिकारी नहीं देते सड़क के गड्ढे भरने में ध्यान
एनएच-43 के इस हिस्से को देखकर सहज ही सवाल उठता है कि आखिर सड़क में गड्ढे हैं या गड्ढों में कहीं सड़क बची है? रोजाना हजारों वाहन इस मार्ग से गुजरते हैं, बावजूद इसके सड़क की मरम्मत को लेकर जिम्मेदार विभाग की ओर से अब तक ठोस पहल नजर नहीं आ रही है।
वहीं, जशपुर रोड की स्थिति भी कुछ अलग नहीं है। पुराने अस्पताल से लेकर गुरुकुल कॉलेज तक कई स्थानों पर सड़क में बड़े-बड़े गड्ढे बन चुके हैं। बारिश के कारण इनकी स्थिति और भी गंभीर हो गई है। सड़क पर बने गड्ढे वाहन चालकों के लिए लगातार खतरा बने हुए हैं। क्या बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहा राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग अधिकारी सड़कों को सुधारने चलने लायक बनाने में नहीं देते ध्यान कहने को तो केंद्र सरकार में राष्ट्रीय राजमार्ग सड़क आता है।

पर सड़क के गड्ढों की हालत देखने से गांव के सड़कों से भी ज्यादा खराब हालत मे हैं राष्ट्रीय राजमार्ग शहर की सड़क
सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर जिम्मेदार अधिकारी इन खतरनाक गड्ढों को कब भरेंगे क्या विभाग किसी बड़ी दुर्घटना के बाद ही जागेगा स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सड़कों की तत्काल मरम्मत कर गड्ढों को भरा जाना चाहिए, ताकि रोजमर्रा का सफर करने वाले लोगों को राहत मिल सके।अब देखना यह है कि एनएच-43 के गड्ढों पर विभाग कब ‘मरहम-पट्टी’ करता है, या फिर नागरिकों को इसी तरह बदहाल सड़कों पर अपनी जान जोखिम में डालकर सफर करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।


























